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 amitdsvv on Apr 21, 2012
आदरणीय श्रीमान,
सादर प्रणाम, मेरा नाम अमित कुमार पाण्डेय है और मैं वाराणसी का रहने वाला हूं । फिलहाल मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टीवी जर्नलिस्ट हूं । बड़े दुख के साथ आपको सूचित करना पड़ रहा है की मेरे पूज्यनीय पिता श्री विन्ध्याचल पाण्डेय जी ने 1973 से लेकर 2010 तक 37 साल लोक निर्माण विभाग की सेवा की । सर मेरे पिताजी ने सच्ची कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से विभाग की सेवा की । और तो और उन्होने देहावसान भी सर्विस से रिटायरमेंट के 19 दिनों बाद लिया । दिनांक 31-12-2009 को पिताजी सेवानिवृत हुए और 19 जनवरी 2010 को उन्होने शरीर छोड़ा । मेरे पिताजी ने सेवानिवृति अवर अभियन्ता के रुप में प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग वाराणसी से लिया ।
खैर जैसे-तैसे हमने अपनी बूढ़ी विधवा मां के साथ इस बज्रघात के बाद तिनका -तिनका जोड़ के नीड का निर्माण फिर से करने की कोशिश करने लगा, हालांकी ये एक असफल प्रयास मात्र था क्योंकि पिताजी के जाने के बाद एक ऐसा विराट शून्य बन चुका था जिसे भर पाना शायद नामुमकिन था । लेकिन उसके बाद से मुझे देश के ऐसे स्याह पक्ष से रु-ब-रु होना पड़ा जिसका नाम भ्रष्टाचार है । उसके बाद से हमें लोक निमार्ण विभाग से अपने पैसे लेने के लिये विभाग के दफ्तरों में पग-पग पर कहीं दक्षिणा तो कहीं नज़राना पेश करना पड़ रहा है । और इन सब प्रकमों के बावजूद भी अभी तक हम लोगों को पिताजी के जीपीएफ का भुगतान नहीं हो पाया है । विभाग के बाबू कहतें है की 2/84 से 6/84 की एन्ट्री नहीं है पीएफ सर्विस बुक पर जब वो हो जायेगी तब आना । पिताजी को गये लगभग ढ़ाई साल का वक्त बीत गया लेकिन अभी तक एन्ट्री नहीं हो पायी है और आगे कब तक होगी इसकी जवाबदेही किसी के पास नहीं है । हमें लगातार लालफीताशाही का शिकार होना पड़ रहा है । लगातार शोषित होने के बाद भी हमने धैर्य नहीं खोया है और आशा नहीं अपितु सम्पू्र्ण विश्वास के साथ ये पत्र लिख रहां हूं की इस पर कार्यवाही की जायेगी । कृप्या इसे संज्ञान में लेकर हमारा मार्गदर्शन करें । इसके लिये मै सदैव आपका आभारी रहूंगा ।।
सधन्यवाद
अमित कुमार पाण्डेय
s/o स्व श्री विन्ध्याचल पाण्डेय
जीपीएफ पासबुक नंबर - PWDU 17900
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आदरणीय श्रीमान,
सादर प्रणाम, मेरा नाम अमित कुमार पाण्डेय है और मैं वाराणसी का रहने वाला हूं । फिलहाल मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टीवी जर्नलिस्ट हूं । बड़े दुख के साथ आपको सूचित करना पड़ रहा है की मेरे पूज्यनीय पिता श्री विन्ध्याचल पाण्डेय जी ने 1973 से लेकर 2010 तक 37 साल लोक निर्माण विभाग की सेवा की । सर मेरे पिताजी ने सच्ची कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी Show more... से विभाग की सेवा की । और तो और उन्होने देहावसान भी सर्विस से रिटायरमेंट के 19 दिनों बाद लिया । दिनांक 31-12-2009 को पिताजी सेवानिवृत हुए और 19 जनवरी 2010 को उन्होने शरीर छोड़ा । मेरे पिताजी ने सेवानिवृति अवर अभियन्ता के रुप में प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग वाराणसी से लिया ।
खैर जैसे-तैसे हमने अपनी बूढ़ी विधवा मां के साथ इस बज्रघात के बाद तिनका -तिनका जोड़ के नीड का निर्माण फिर से करने की कोशिश करने लगा, हालांकी ये एक असफल प्रयास मात्र था क्योंकि पिताजी के जाने के बाद एक ऐसा विराट शून्य बन चुका था जिसे भर पाना शायद नामुमकिन था । लेकिन उसके बाद से मुझे देश के ऐसे स्याह पक्ष से रु-ब-रु होना पड़ा जिसका नाम भ्रष्टाचार है । उसके बाद से हमें लोक निमार्ण विभाग से अपने पैसे लेने के लिये विभाग के दफ्तरों में पग-पग पर कहीं दक्षिणा तो कहीं नज़राना पेश करना पड़ रहा है । और इन सब प्रकमों के बावजूद भी अभी तक हम लोगों को पिताजी के जीपीएफ का भुगतान नहीं हो पाया है । विभाग के बाबू कहतें है की 2/84 से 6/84 की एन्ट्री नहीं है पीएफ सर्विस बुक पर जब वो हो जायेगी तब आना । पिताजी को गये लगभग ढ़ाई साल का वक्त बीत गया लेकिन अभी तक एन्ट्री नहीं हो पायी है और आगे कब तक होगी इसकी जवाबदेही किसी के पास नहीं है । हमें लगातार लालफीताशाही का शिकार होना पड़ रहा है । लगातार शोषित होने के बाद भी हमने धैर्य नहीं खोया है और आशा नहीं अपितु सम्पू्र्ण विश्वास के साथ ये पत्र लिख रहां हूं की इस पर कार्यवाही की जायेगी । कृप्या इसे संज्ञान में लेकर हमारा मार्गदर्शन करें । इसके लिये मै सदैव आपका आभारी रहूंगा ।।
सधन्यवाद
अमित कुमार पाण्डेय
s/o स्व श्री विन्ध्याचल पाण्डेय
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