| Address: 99,bhagirath doc, part -1 Varachha L. H. Road, Surat, Gujarat, 395006 |
औरजैसे ही टà¥à¤°à¥‡à¤¨ रवाना होने को हà¥à¤ˆ, à¤à¤• औरत और उसका पति à¤à¤• टà¥à¤°à¤‚क लिठडिबà¥à¤¬à¥‡ में घà¥à¤¸ पडे़। दरवाजे के पास ही औरत तो बैठगई पर आदमी चिंतातà¥à¤° खड़ा था। जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़रà¥à¤µà¥‡à¤¶à¤¨ डिबà¥à¤¬à¤¾ है। टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिà¤à¥¤ " ये जनरल टिकट है।अगले सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ पर जनरल डिबà¥à¤¬à¥‡ में चले जाना।वरना आठसौ की रसीद बनेगी।" कह टीसी आगे चला गया। पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे। सेठने बड़ी मà¥à¤¶à¥à¤•िल से दो दिन की छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ और सात सौ रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚स दिठथे। बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहà¥à¤¤ कोशिश की पर घà¥à¤¸ नहीं पाठथे। लाचार हो सà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤° कà¥à¤²à¤¾à¤¸ में आ गठथे। " साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिबà¥à¤¬à¥‡ में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।" टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हà¥à¤ कहा। " सौ में कà¥à¤› नहीं होता।आठसौ निकालो वरना उतर जाओ।" " आठसौ तो गà¥à¤¡à¥à¤¡à¥‹ की डिलिवरी में à¤à¥€ नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पतà¥à¤¨à¥€ ने कहा। " तो फिर à¤à¤¸à¤¾ करो, चार सौ निकालो।à¤à¤• की रसीद बना देता हूà¤, दोनों बैठे रहो।" " ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ बढ़ाते हà¥à¤ आदमी बोला। " नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी। ऊपर से आरà¥à¤¡à¤° है।रसीद तो बनेगी ही। चलो, जलà¥à¤¦à¥€ चार सौ निकालो।वरना सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।" इस बार कà¥à¤› डांटते हà¥à¤ टीसी बोला। आदमी ने चार सौ रà¥à¤ªà¤ à¤à¤¸à¥‡ दिठमानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो। दोनों पति-पतà¥à¤¨à¥€ उदास रà¥à¤†à¤‚से à¤à¤¸à¥‡ बैठे थे, मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक में जा रहे हो। कैसे à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥à¤Ÿ करेंगे ये चार सौ रà¥à¤ªà¤? कà¥à¤¯à¤¾ वापसी की टिकट के लिठसमधी से पैसे मांगना होगा? नहीं-नहीं। आखिर में पति बोला- " सौ- डेढ़ सौ तो मैं जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लाया ही था। गà¥à¤¡à¥à¤¡à¥‹ के घर पैदल ही चलेंगे। शाम को खाना नहीं खायेंगे। दो सौ तो à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥à¤Ÿ हो गà¤à¥¤ और हाà¤, आते वकà¥à¤¤ पैसिंजर से आयेंगे। सौ रूपठबचेंगे। à¤à¤• दिन जरूर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लगेगा। सेठà¤à¥€ चिलà¥à¤²à¤¾à¤¯à¥‡à¤—ा। मगर मà¥à¤¨à¥à¤¨à¥‡ के लिठसब सह लूंगा।मगर फिर à¤à¥€ ये तो तीन सौ ही हà¥à¤à¥¤" " à¤à¤¸à¤¾ करते हैं, नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न, अब दोनों मिलकर सौ देंगे। हम अलग थोड़े ही हैं। हो गठन चार सौ à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥à¤Ÿà¥¤" पतà¥à¤¨à¥€ के कहा। " मगर मà¥à¤¨à¥à¤¨à¥‡ के कम करना..."" और पति की आà¤à¤– छलक पड़ी। " मन कà¥à¤¯à¥‚ठà¤à¤¾à¤°à¥€ करते हो जी। गà¥à¤¡à¥à¤¡à¥‹ जब मà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¾ को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दे देंगे। " कहते हà¥à¤ उसकी आà¤à¤– à¤à¥€ छलक उठी। फिर आà¤à¤– पोंछते हà¥à¤ बोली- " अगर मà¥à¤à¥‡ कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-" इतने पैसों की बà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ टà¥à¤°à¥‡à¤¨ चलाने के बजाय, इतने पैसों से हर टà¥à¤°à¥‡à¤¨ में चार-चार जनरल बोगी लगा दो, जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हà¥à¤ à¤à¥€ जलील होना पड़े और ना ही हमारे मà¥à¤¨à¥à¤¨à¥‡ के सौ रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ कम हो।" उसकी आà¤à¤– फिर छलक पड़ी। " अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं, हमें वोट देने का तो अधिकार है, पर सलाह देने का नहीं। रो मत। (विनमà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ है जो à¤à¥€ इस कहानी को पढ़ चूका है उसे इस घटना से शायद ही इतà¥à¤¤à¤¿à¥žà¤¾à¥˜ हो पर अगर ये कहानी शेयर करे, कॉपी पेसà¥à¤Ÿ करे, पर रà¥à¤•ने न दे शायद रेल मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ जनरल बोगी की à¤à¥€ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को समठसके। उसमे सफर करने वाला à¤à¤• गरीब तबका है जिसका शोषण चिर कालीन से होता आया है। à¤à¤• कोशिश परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤•ीओर
Indian Railways customer support has been notified about the posted complaint.